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Thursday, March 1, 2012

आदतन् …आदतन …।



आदतन जो रिश्ते बनते हैं
आदतन साथ चलते हैं
उनमें कोई बात हो - ज़रूरी नहीं


रश्मि प्रभा
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आदतन् …आदतन …।

कभी मै तेरी आदत से परेशान
कभी तेरी आदत मुझसे पशेमान
हमारा रिश्ता भी आदतन था न
रूठ के बिफ़र गया था उस रात

कर गया जान को रूह से जुदा …
अनजाने जब कभी जोड देती हू
तेरे नाम से अपना नाम आदतन
कह देती है रूठी रूह की धडक…।

गुमनाम से शहर के नाराज़ बाशिन्दे
चल कल के नशेमन मे वापस जा देख
वही पर बैठे है परेशानी और पशेमान
साथ मिलकर आदतन् …आदतन …।


गायत्री 

11 comments:

Anju said...

aadat .......jb ho jaye to jati bhi nhi ......uske bina koi shai bhaati bhi nhi ....../

Vibha Rani Shrivastava said...

कर गया जान को रूह से जुदा …
अनजाने जब कभी जोड देती हू
तेरे नाम से अपना नाम आदतन
कह देती है रूठी रूह की धडक…।

आदत भी तो होता जिद्दी ... जो बदलने से बदलता भी नहीं .... !!

आदतन जो रिश्ते बनते हैं....
उनक़ा अजांम ये होना ... रूठ के बिफ़र जाना ... ?

डा. अरुणा कपूर. said...

आदतन बहुत कुछ घटित हो जाता है...सुन्दर रचना!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

ये आदतें ही तो हैं जिनको बदलना मुश्किल हो जाता है ... सुंदर अभिव्यक्ति

mridula pradhan said...

उनमें कोई बात हो - ज़रूरी नहीं....fir bhi ek aadat si hai.

वाणी गीत said...

बात ना सही आदत तो है !

वन्दना said...

आदतें भला कब छूटती हैं।

anju(anu) choudhary said...

आदतन ...कुछ बाते जाने अनजाने में भी हो जाती हैं

कविता रावत said...

गुमनाम से शहर के नाराज़ बाशिन्दे
चल कल के नशेमन मे वापस जा देख
वही पर बैठे है परेशानी और पशेमान
साथ मिलकर आदतन् …आदतन …।
..बहुत खूब!
आदत अच्छी हो तो फिर क्या कहने..
..सुन्दर प्रस्तुति..

Mamta Bajpai said...

बहुत उम्दा लिखा है बधाई

sumukh bansal said...

acchi rachana.. aadatan....:)

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