ज़िन्दगी के दर्द ह्रदय से निकलकर बन जाते हैं कभी गीत, कभी कहानी, कोई नज़्म, कोई याद ......जो चलते हैं हमारे साथ, ....... वक़्त निकालकर बैठते हैं वटवृक्ष के नीचे , सुनाते हैं अपनी दास्ताँ उसकी छाया में ।

लगाते हैं एक पौधा उम्मीदों की ज़मीन पर और उसकी जड़ों को मजबूती देते हैं ,करते हैं भावनाओं का सिंचन उर्वर शब्दों की क्यारी में और हमारी बौद्धिक यात्रा का आरम्भ करते हैं....

आप सभी का स्वागत है इस यात्रा में कवयित्री रश्मि प्रभा के साथ .....

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एक ऐसी ई-पत्रिका जिसमें  आप साहित्य ,संस्कृति और सरोकार से एकसाथ रूबरू होते हैं . जहां आपकी सदिच्छा के अनुरूप सामग्रियां मिलती है. जो आपकी सृजनात्कता को पूरे विश्व की सृजनात्मकता से जोड़ने को सदैब प्रतिबद्ध रहती है.              अपनी रचनाएँ इस ई-मेल पर भेजें :

Wednesday, February 29, 2012

अनकही



कई बातें होठों तक आती हैं
फिर रास्ते बदल गले में अटक जाती है
अनकही होकर झकझोरती रहती हैं
......



रश्मि प्रभा

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अनकही

रह जाती है बहुत कुछ
अनकही
सुप्त, या फिर बेबस, बेचैन ,
शब्द बन जन्म लेते है
जज्बात
मंथन गतिमान होता
उड़कर बाहर आने को आतुर
व्याकुल
होठों तक पहुँच काँप उठते
फिर भी अनकही रह जाती ,
ख़ामोशी
एक चादर तान देती
और छिप कर रह जाते
बहुत कुछ,
एक प्रयत्न पुन:
गतिमान
शब्दों का निर्मित स्वरुप
भावों की उड़ान
सागर की लहरों सा
संघर्ष
फिर भी रह जाती
अनकही ।
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डॉ . संध्या तिवारी

12 comments:

vidya said...

बहुत सुन्दर भाव...

सच है अनकहा घुटन पैदा करता है...

डा. अरुणा कपूर. said...

सुन्दर शब्दों का संगम!...सुन्दर अभिव्यक्ति!

Vibha Rani Shrivastava said...

शब्दों का निर्मित स्वरुप
भावों की उड़ान
सागर की लहरों सा
संघर्ष
फिर भी रह जाती
है जब अनकही ... दम-घुटता .... गला-रुन्धता लगता है.... !!
अति-सुन्दर अभिव्यक्ति.... !!

kanu..... said...

pahli baar padha aapko accha laga...

mridula pradhan said...

कई बातें होठों तक आती हैं
फिर रास्ते बदल गले में अटक जाती है
अनकही होकर झकझोरती रहती हैं.....aur ye silsila chalta rahta hai kayee dinon tak.....

Rajesh Kumari said...

kai baar koshish karte hue bhi ankahi man ke bheeter hi simat jaati hai.bhaavon ko bahut sundar tareeke se prastut kiya hai.

ASHA BISHT said...

nice...

वन्दना said...

्जो अनकहा रह जाता है वो ही तो लिखने को प्रेरित करता है।

sushma 'आहुति' said...

खुबसूरत अल्फाजों में पिरोये जज़्बात...

babanpandey said...

मैं वंदना जी के विचारों से सहमत हूँ ....

Ranjan Prasad said...

prastuti ke sath rachna padhna achha laga...

संगीता तोमर Sangeeta Tomar said...

सुंदर प्रस्तुति.....

ये हैं हमारे प्रथम परिकल्पना सम्मान-२०१० के सम्मानित सदस्यगण