ज़िन्दगी के दर्द ह्रदय से निकलकर बन जाते हैं कभी गीत, कभी कहानी, कोई नज़्म, कोई याद ......जो चलते हैं हमारे साथ, ....... वक़्त निकालकर बैठते हैं वटवृक्ष के नीचे , सुनाते हैं अपनी दास्ताँ उसकी छाया में ।

लगाते हैं एक पौधा उम्मीदों की ज़मीन पर और उसकी जड़ों को मजबूती देते हैं ,करते हैं भावनाओं का सिंचन उर्वर शब्दों की क्यारी में और हमारी बौद्धिक यात्रा का आरम्भ करते हैं....

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Monday, January 30, 2012

कुछ तो करो लोगों



दोष इसका है या उसका है , इसको बताने से पहले
अपने इस मुल्क के लिए कुछ तो कर जाओ लोगों ...


रश्मि प्रभा


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कुछ तो करो लोगों

अक्सर यहाँ वहां होने वाले दंगों के बाद लगी आग ने ये लिखने पर मजबूर किया मजबूरी इसलिए क्योंकि ऐसी ग़ज़लें खुशी में नहीं लिखी जातीं ।

आग ही आग है हर सिम्त बुझाओ लोगों
जल रहे बस्ती में इन्सान बचाओ लोगों

दुश्मनी खत्म हो और दोस्ती का हाथ बढे
हो सके गर तो ये एहसास जगाओ लोगों

दुश्मनी किस से है क्यों है ये अलग मसला है
नन्हें बच्चों पे तो मत दाओ लगाओ लोगों

टूटी ऐनक है जले बसते हरी चूड़ी है
जाओ बस्ती में ज़रा देख के आओ लोगों

बेखताओं को न मारो यही कहते हैं धरम
जो नहीं जानते ये उन को बताओ लोगों


जब के रावण था मरा , राम ने ये हुक्म दिया
साथ इज्ज़त के रसूमात निभाओ लोगों

दिल है बेचैन 'शेफा' मुल्क की इस हालत पर
अब भी खामोश हैं हम ख़ुद को जगाओ लोगों
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इस्मत जैदी

14 comments:

सदा said...

दुश्मनी खत्म हो और दोस्ती का हाथ बढे
हो सके गर तो ये एहसास जगाओ लोगों

दुश्मनी किस से है क्यों है ये अलग मसला है
नन्हें बच्चों पे तो मत दाओ लगाओ लोगों
सार्थक व सटीक बात कही है आपने ...आभार ।

वन्दना said...

सार्थक चिन्तन को दर्शाती गज़ल्।

दीपिका रानी said...

ये एहसास सभी में जग जाएं, तो यह दुनिया जन्नत बन जाए..

hridyanubhuti said...

दोष इसका है या उसका है , इसको बताने से पहले
अपने इस मुल्क के लिए कुछ तो कर जाओ लोगों ...
सत्य है यही,यही जगाना है।

सादर

vidya said...

बहुत खूब....

काश कि ये बातें लोगों की समझ में आ जाती..
सार्थक गज़ल..

वाणी गीत said...

सार्थक आह्वान!

अनुपमा पाठक said...

दुन्दुभी बन कर गूंजे यह आह्वान!
बहुत खूब!

Rajesh Kumari said...

bahut prerir karti hui behtreen ghazal.

Maheshwari kaneri said...

सार्थक आह्वान!

Maheshwari kaneri said...

सार्थक आह्वान!

Reena Maurya said...

दिल है बेचैन 'शेफा' मुल्क की इस हालत पर
अब भी खामोश हैं हम ख़ुद को जगाओ लोगों
सार्थक सन्देश देती अभिव्यक्ति

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर सृजन , बधाई.

vandana said...

बहुत बढ़िया सोच

Vibha Rani Shrivastava said...

दुश्मनी खत्म हो और दोस्ती का हाथ बढे ,
दुश्मनी किस से है क्यों है ये अलग मसला है.... !!!
जब के रावण था मरा , राम ने ये हुक्म दिया
साथ इज्ज़त के रसूमात निभाओ लोगों.... !!!!!!!!!!!
काश ये बातें सभी के समझ आजाती ,धरती जन्नत बन जाती..... !!

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